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बाबा नानक और पाखंडी पंडित

सुबह का समय था सूर्य उदय हो रहा था। एक पंडित पेड़ के नीचे आंखें बंद करके बैठा हुआ था। बीच-बीच में वह पंडित आसमान की तरह देख रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे कि वह किसी गहरी सोच में हो। थोड़ी थोड़ी देर बाद में है हल्का-हल्का मुस्कुरा भी रहे थे, उनके सामने ही एक दानपात्र रखा हुआ था।

थोड़ी देर बाद उधर से एक आदमी गुजरा। उसने पंडित जी को सोच की मुद्रा में बैठे देखा तो वह वहीं पर रुक गया, उसने अपने जेब से कुछ पैसे निकाले और दान पत्र में डाल दिए और वहीं पर बैठ गया। उसको देखकर वहां और भी बहुत सारे लोग आ गए। सब लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पत्र में पैसे डाल रहे थे और पंडित जी के सामने बैठ रहे थे। कुछ लोग आपस में धीरे-धीरे बातें भी कर रहे थे कि आज पंडित जी कुछ ज्यादा ही ध्यान मग्न है। कोई विशेष बात लगती है।

सब लोग इसी इंतजार में बैठे थे कि कब पंडित जी आंखें खोलते हैं कि इतने में दो व्यक्ति वहां पर आए। दोनों में से एक व्यक्ति के चेहरे पर नूर झलक रहा था, दूसरा आदमी भी भलामानुश लग रहा था। वह लोग कोई और नहीं थे, वे बाबा नानक जी और भाई मरदाना थे। भाई मरदाना ने चुपके से दान पत्र को सामने से उठाकर पंडित जी के पीछे रख दिया। फिर वह दोनों संगत के बीच में बैठ गए। अब दिन पूरी तरह से निकल चुका था।

थोड़ी देर बाद पंडित जी ने अपनी आंखें खोली। और अपना प्रवचन शुरू कर दिया कि भगवान आप सब लोगों से बहुत प्रसन्न है। स्वर्ग लोक में सत्संग चल रहा है । सभी लोग स्वर्ग में प्रसन्नता पूर्वक रह रहे हैं। नारद जी भी वहां है. भोले भंडारी नाच रहे हैं। यह बातें कह कर बातें, पंडित जी ने लोगों से कहा आप लोग बहुत किस्मत वाले हो जो मेरी वजह से स्वर्ग की बातें सुन रहे हो। आप लोग ज्यादा से ज्यादा ईश्वर की भक्ति करो, ईश्वर आपकी सारी मुरादें पूरी करेगा।

पंडित जी की बात सुनकर बाबा नानक ने पूछा भले आदमी यह तुम क्या कह रहे हो। पंडित जी ने बाबा नानक की तरफ देखा, बाबा नानक का अलौकिक रूप देखकर वह थोड़ा डर गया के अब मैं पकड़ा जाऊंगा। लेकिन फिर भी वह हिम्मत करके बोला, मैं इन लोगों को स्वर्ग लोक की बातें सुना रहा हूं। बाबा नानक ने कहा आप इस दुनिया में बैठकर इनको स्वर्ग लोक की बातें कैसे बता सकते हो कि वहां क्या हो रहा है ? पंडित जी ने कहा मेरे पास दिव्य दृष्टि है, मैं अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर इनको बता सकता हूं कि स्वर्ग लोक में क्या हो रहा है।

बाबा नानक ने उनको कहा कि भले आदमी तुम्हारा दानपात्र कहां है। पंडित ने एकदम हड़बड़ा कर नीचे देखा, और दानपात्र को वहां ना देखकर वह जोर से चिल्लाया, मेरा दानपत्र कहां चला गया। दानपात्र को कौन ले गया। बाबा नानक ने कहा भले आदमी जब तुम अपनी दिव्य दृष्टि से स्वर्ग लोक को देख सकते हो, तो तुम यह भी पता कर सकते  हो कि तुम्हारा दानपात्र कहां है। बाबा नानक की बात सुनकर वह आदमी जोर से चिल्लाया। आप मेरे से फालतू बातें मत करो नहीं तो मैं आपको श्राप दे दूंगा। बाबा नानक ने कहा आंखें बंद करके स्वर्ग की बातें बता सकते  हो, लेकिन जो कुछ तुम्हारे सामने हो रहा है वह तुम नहीं बता सकते। यह आपकी कैसी दिव्य दृष्टि है ? यह बातें सुनकर सामने सारे बैठे लोग हंसने लगे। इतने में से एक व्यक्ति ने दानपात्र पीछे से उठाकर पंडित जी के सामने रख दिया।

बाबा नानक ने पंडित जी से कहा इस धरती पर क्या हो रहा है वह तुम बता नहीं सकते, और तुम स्वर्ग की बातें करते हो। यह कोई धार्मिक संदेश नहीं है बल्कि एक पाखंड है जो आप इन भोले-भाले लोगों के साथ कर रहे हो।


इतने मैं मरदाना जी ने रबाब निकाली और बजानी शुरू कर दी। सारे लोग भक्ति में झूमने लगे उनको भक्ति में मगन देखकर पंडित जी गुस्से में उठकर चल दिए। सब लोगों को पंडित जी की असलियत पता चल गई थी इसलिए उनके जाने का किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। बाबा नानक जी ने सबको पाखंड और आडंबर से दूर रहने के लिए कहा। उस गांव में सभी बाबा नानक जी की तारीफ करने लगे कि बाबा जी ने हमें झूठे पाखंड से बचा लिया। बाबा नानक की ख्याति बहुत ज्यादा बढ़ने लगी।

सब लोगों को यह पता चल गया कि बाबा नानक जी और मर्दाना बंगाल और आसाम से होते हुए जगन्नाथपुरी पधारे हैं। बाबा नानक की प्रेम भरी बातें सुनकर उस गांव के सारे लोग रोज उनका कीर्तन सुनने आने लगे। उधर पंडित जी बहुत ही गुस्से में थे बाबा नानक की वजह से उसका भेद खुल गया था। उसने सोचा मैं कुछ अपने भक्तों को साथ लेकर बाबा नानक जी से वाद-विवाद करने जाऊंगा, और उनको हरा दूंगा। इससे गांव वालों के बीच मेरा विश्वास फिर से बढ़ जाएगा।

उस गांव में एक पंडा थथरी नाम का पंडित भी रहता था उसकी धर्मशाला में दूर-दूर से ज्ञानी आते थे, इस वजह से उसके पास काफी धन भी इकट्ठा हो गया था। ज्यादा धन की वजह से उसमें घमंड भी बहुत आ गया था और वह बहुत ही गुस्से वाला था। पंडित उस पंडा थथरी के पास पहुंचा और जाकर अपना दुखड़ा सुनाया। और कहा यह फकीर जहां भी जाते हैं अपने दिव्य रूप की वजह से सब को अपने वश में कर लेते हैं। पता नहीं यह किस तरह के फकीर हैं।सब धर्मों को एक ही नजर से देखते हैं। इनकी ख्याति और ज्यादा फैले उससे पहले हमें इनके पंख काट देने चाहिए, नहीं तो आप की गद्दी भी एक दिन खतरे में पड़ जाएगी।

उसकी बातें सुनकर पंडा थथरी गुस्से में बोला मेरी गद्दी किसी की वजह से भी खतरे में नहीं पड सकती, मैं आज ही उस फकीर को संदेश भेजता हूं। पंडा थथरी का संदेश लेकर एक आदमी बाबा नानक के पास पहुंचा और कहा, इस गांव में पंडा थथरी का राज चलता है। आप इस गांव को छोड़कर अभी के अभी चले जाओ।

बाबा नानक ने कहा मैं इस गांव में आया नहीं हूं, मुझे भेजा गया है। जब मुझे उसका हुक्म होगा तब मैं चला जाऊंगा। उस आदमी ने कहा फिर आपको इसका बहुत बुरा नतीजा भुगतना पड़ेगा। बाबा नानक ने कहा नतीजा तो ईश्वर के हाथ में है, वह जो कुछ भी करेंगे उस को मैं हाथ जोड़ कर स्वीकार कर लूंगा। वह आदमी गुस्से में बोला आप जाओगे या नहीं । बाबा नानक ने कहा नदियों के बहाव को कौन रोक सकता है, हवाओं को कौन रोक सकता है। सब कुछ उस ईश्वर के हाथ में है, जब भी वह चाहेगा मैं यहां से चला जाऊंगा। जब वह व्यक्ति बाबा नानक को 

उस आदमी ने जाकर पंडा थथरी को कहा, मैंने उस फकीर को बहुत डराने की कोशिश की लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। उसके सहनशीलता देखकर मैं हैरान रह गया। वह बहुत धीरज वाला व्यक्ति हैं और उसके चेहरे पर दिव्य रूप है, मुझे नहीं लगता वह आपकी बात मानेगा ।

उसकी बात सुनकर पंडा थथरी गुस्से में बोला अगर वह झुकेगा नहीं तो उसे तोड़ दिया जाएगा। तुम सो आदमी लेकर जाओ और उसको धक्के मार कर गांव से बाहर निकाल दो। गांव वालों को जब यह बात पता चली वह बाबा नानक के पास गए और कहा कि पंडा थथरी बहुत ताकत वाला है वह आपको मरवा देगा। आप हमारे साथ चलो, बाबा नानक ने कहा मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। तुम चिंता मत करो ईश्वर की मर्जी के बिना कुछ भी नहीं हो सकता। लेकिन कुछ लोग बाबा नानक की हिफाजत करने के लिए वहीं पर रुक गए।

तभी कुछ शोर सुनाई दिया, बहुत सारे लोग लाठी लेकर आ रहे थे। वह लोग आकर बाबा नानक के पास रुक गए और उन्हें नफरत भरी नजर से देखने लगे। यह देख कर भाई मरदाना भी डरने लगा। गुरुजी ने कहा भाई मरदाना डरो मत जिसके साथ वाहेगुरु होता है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तुम अपना रबाब निकालो और बजाओ। पंडा थथरी भी वहां आ गया। पंडित जी भी बाबा नानक के पीछे खड़े थे पता नहीं एकदम क्या हुआ वह चक्कर खा कर नीचे गिर गए। पंडा थथरी भी बाबा नानक जी का दिव्य रूप और पंडित को चक्कर खा कर नीचे गिरते हुए देखकर डर गया।

उसने बाबा नानक को कहा कि आप यहां से चले क्यों नहीं जाते, बाबा नानक ने कहा जब उसका हुक्म होगा तब मैं यहां से चला जाऊंगा। पंडा थथरी बोला किसका हुकुम ? किसने आपको यहां भेजा है। कौन है वह ? बाबा नानक ने कहा वह सारी सृष्टि का सृजनहार है। पंडा थथरी बोला वह कौन है ? बाबा नानक ने कहा वह यही है, पंडा थथरी बोला लेकिन मुझे तो वह नजर नहीं आ रहा। बाबा नानक ने कहा जब तक मन में बुरे विचार होंगे वह कैसे नजर आएगा। पंडा थथरी बोला आप इतने लोगों को देखकर भी नहीं डर रहे। बाबा नानक ने कहां ना मैं किसी से डरता हूं ना मैं किसी को डराता हूं। मुझे तो सिर्फ ईश्वर का डर है जो हम सभी को होना चाहिए।

ईश्वर का डर हमें पवित्र बनाता है। जो ईश्वर से डरेगा वह दुनिया के सभी डरो से मुक्त हो जाएगा। पंडा थथरी गुरुजी की बातें सुनकर थोड़ा नरम हो गया और बोला गुरु जी आप मेरे मित्र बन जाओ। जो कुछ भी आपको चाहिए मेरे से ले लो। मेरी सारी धन दौलत ले लो लेकिन मेरी इतनी सी प्रार्थना है कि इन सभी लोगों के सामने मेरा आदर कम नहीं होना चाहिए। बाबा नानक ने कहा मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं तो सिर्फ ईश्वर की भक्ति का आनंद मानता हूं। हमेशा सत्य का साथ दो, सभी तुम्हारा आदर करेंगे। पंडा थथरी बोला लगता है कि आपके पास ईश्वर का संपूर्ण ज्ञान है। गुरुजी ने कहा ईश्वर का सारा ज्ञान तो उसी के पास है, उसको कोई नहीं ले सकता।

पंडा थथरी बोला अगर ईश्वर का ज्ञान उसी के पास है, तो आप भी कम नहीं हो, मैंने आज तक आप जैसा ज्ञानी कोई नहीं देखा। बाबा नानक ने कहा ईश्वर का ज्ञान तो अनंत है, उसका कोई अंत नहीं पा सकता। ईश्वर था, ईश्वर है, और हमेशा रहेगा।  पंडा थथरी बोला आप ईश्वर ने इतना लीन हो जैसे तपती भट्टी में लोहा लेकिन आपकी वजह से एक आदमी मर रहा है, उसके मरने का जिम्मेदार कौन है। इसका जिम्मेदार वह है जिसने मुझे मरवाने के लिए भेजा है। मेरे दिल में किसी के लिए भी बैर भाव नहीं है, इतने में पंडित को भी होश आ गया। दोनों गुरु जी के चरणों में गिर पड़े।

बाबा नानक ने कहा अगर आप पत्थर पर अपना सिर मारोगे तो अपना ही सिर तूड़वा लोगे, अगर तुम किसी के लिए बुरा सोचोगे तो अपना ही बुरा कर लोगे। दुनिया में हमेशा मानवता का संदेश फैलाना चाहिए, पाखंड नहीं। गुरु नानक देव जी पंडित और पंडा थथरी को जीवन का संदेश देकर अपनी अगली यात्रा पर चल पड़े ।

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